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Wednesday, January 26, 2011

वही जज़्बा पुराना चाहिये

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

हाज़िर है, एक ग़ज़ल
जश्ने-जम्हूरी हमें यूं भी मनाना चाहिये
क़ौमी यकजहती का इक सूरज उगाना चाहिये

दर्द तेरे ज़ख्म का उभरे मेरे दिल में अगर
आंख में तेरी, मेरा आंसू भी आना चाहिये

वो जो कल बिस्मिल भगत अशफाक़ के सीनों में था
नौजवानों में वही जज़्बा पुराना चाहिये

फिर यहां टैगोर का गूंजे फिज़ां में राष्ट्रगान
फिर यहां इक़बाल का क़ौमी तराना चाहिये

साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये

शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

35 comments:

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीय भईजान शाहिद मिर्ज़ा जी
सादर अभिवादन !

क्या शानदार ग़ज़ल दी है जनाब ! शुक्रिया और मुबारकबाद !

वो जो कल बिस्मिल भगत अशफाक़ के सीनों में था
नौजवानों में वही जज़्बा पुराना चाहिये

साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये

जी कर रहा है पूरी ग़ज़ल कोट करदूं …
बेहतरीन जज़्बात !
बेहतरीन अल्फ़ाज़ !
वाह वाऽऽह व्वाऽऽऽऽह !!

आपको भी गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार

इस्मत ज़ैदी said...

दर्द तेरे ज़ख्म का उभरे मेरे दिल में अगर
आंख में तेरी, मेरा आंसू भी आना चाहिये

वो जो कल बिस्मिल भगत अशफाक़ के सीनों में था
नौजवानों में वही जज़्बा पुराना चाहिये

फिर यहां टैगोर का गूंजे फिज़ां में राष्ट्रगान
फिर यहां इक़बाल का क़ौमी तराना चाहिये

सुबहान अल्लाह !
बहुत ख़ूब !
ऐसा जज़्ब ए हुब्बुलवतनी अगर उन में हो जो रहबरान ए क़ौम हैं तो कोई परेशानी ही बाक़ी न रहे
आप के इस जज़्बे को सलाम
मुबारक हो गणतंत्र दिवस और उस मौक़े पर कही गई बेहतरीन ग़ज़ल

निर्मला कपिला said...

दर्द तेरे ज़ख्म का उभरे मेरे दिल में अगर
आंख में तेरी, मेरा आंसू भी आना चाहिये
शाहिद भाई इन्सानियत और दोस्ती का यही तकाज़ा है।

वो जो कल बिस्मिल भगत अशफाक़ के सीनों में था
नौजवानों में वही जज़्बा पुराना चाहिये
सही बात है आज के युवाओं मे राष्ट्र प्रेम जगाने के एलिये बेहतरीन शेर। पूरी गज़ल बेहद पसंद आयी।

आपको गनतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें।

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.....
---------
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सुलभ § Sulabh said...

आदरणीय मिर्ज़ा साहब,
आज की ये ग़ज़ल बेमिसाल है. सीधे दिल में उतरती है हम वतनो से जोडती है.
बधाई आपको! जय हिंद!!

फ़िरदौस ख़ान said...

जश्ने-जम्हूरी हमें यूं भी मनाना चाहिये
क़ौमी यकजहती का इक सूरज उगाना चाहिये

बहुत ख़ूब...
आपको गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...

महेन्द्र मिश्र said...

गणतंत्र दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई ....

Kunwar Kusumesh said...

साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये

बहुत प्यारा शेर.
गणतंत्र दिवस की आपको भी हार्दिक शुभकामनायें..

deepak saini said...

वाह शादिह साहब वाह
क्या खूब गजल कही है दिल से वाह वाह निकल रही है
मुबारकबाद कबूल फरमाये

गणतंत्र दिवस की आपको भी हार्दिक शुभकामनायें..

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वो जो कल बिस्मिल भगत अशफाक़ के सीनों में था
नौजवानों में वही जज़्बा पुराना चाहिये

बहुत खूबसूरत और प्रेरणादायक गज़ल

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें.

shikha varshney said...

कितने खूबसूरत भाव हैं गज़ल के..बहुत बहुत सुन्दर.

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाये.

sushant jain said...

दर्द तेरे ज़ख्म का उभरे मेरे दिल में अगर
आंख में तेरी, मेरा आंसू भी आना चाहिये


wah

kshama said...

साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये
Yahee jazbaa bana rahe!
Gantantr diwas bahut,bahut mubarak ho!

नरेन्द्र व्यास said...

गणतंत्र दिवस की आपको भी हार्दिक शुभकामनाएँ..! नमन ! बेहद ही ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए आभार ! एक निवेदन, कृपया कुछ उर्दू शब्दों का अर्थ भी साथ दे दें तो और भी आनंद आए. साधुवाद मिर्ज़ा साहब !

daanish said...

वो जो कल बिस्मिल भगत अशफाक़ के सीनों में था
नौजवानों में वही जज़्बा पुराना चाहिये

देश प्रेम के पावन सन्देश को
हर दिल पहुंचा पाने में कामयाब
एक शानदार और यादगार प्रस्तुति ...
इक इक लफ्ज़, पढने वालों को ,
मानो अपनी ही कही हुई baat लग rahaa है
zindaabaad !!

'साहिल' said...

वाह वाह! क्या ग़ज़ल कही है 'शाहिद' जी
कोई एक शेर quote नहीं करूंगा नहीं तो बाकियों के साथ नाइंसाफी होगी...........सारे शेर दिल को छू गए.

गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!

वन्दना अवस्थी दुबे said...

साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये
बहुत खूब शाहिद जी. यही जज़्बा हर दिल में होना चाहिए. शुभकामनाएं.

नीरज गोस्वामी said...

साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये


वाह...लाजवाब शेर और बेहतरीन ग़ज़ल...गणतंत्र दिवस पर इस से बेहतर बात और क्या हो सकती थी...एक एक शेर गहरी तालीम दे रहा है और देश प्रेम के जज्बे को जगा रहा है...आप और आपकी कलम को सलाम ..

नीरज

शारदा अरोरा said...

ye to ik yaadgaar geet ban jaayega ...

रश्मि प्रभा... said...

jazbaa jab tak n ho wahi purana
dhadkane sunayi nahin dengi ...
shubhkamnayen

rashmi ravija said...

दर्द तेरे ज़ख्म का उभरे मेरे दिल में अगर
आंख में तेरी, मेरा आंसू भी आना चाहिये

बस यही अहसास हर दिल में हो...यही आरज़ू है.
बहुत ही बढ़िया ग़ज़ल ...हर शेर लाज़बाब है

साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये

वाह!!

सुमन'मीत' said...

गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई !

***Punam*** said...

आपके ज़ज्बातों को सलाम...

पूरी की पूरी ग़ज़ल ही लाजवाब है...

कहाँ तक तारीफ की जाये....

माशाल्लाह !!!!

' मिसिर' said...

आपके ज़ज्बे को सलाम शाहिद साहिब,
बड़ी खूबसूरत ग़ज़ल,ख़ुलूस और अकीदत के साथ कही है आपने .

साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये.

बधाई आपको !

dipayan said...

वो जो कल बिस्मिल भगत अशफाक़ के सीनों में था
नौजवानों में वही जज़्बा पुराना चाहिये....
क्या खूब लिखा आपने ।
काश, आज के नौजवानो में ये जज़्बात हो, तो देश का हाल बेहतर हो ।

Shailesh Pandey said...

शाहिद जी ! आपकी ग़ज़ल लाज़वाब लगी .....
आपके खूबसूरत जज्बे को सलाम ...
आपकी ग़ज़ल के जज्बातों में डूबे मेरे दो शब्द

इस जमीं को खून से सींचा चली सोंधी महक,
फिर वही कुर्बानियों का दिन पुराना चाहिए |

अज्म जो हरगिज़ न बदले पत्थरों की चोट से,
बच्चे - बच्चे में मुझे ऐसा दीवाना चाहिए |

रानीविशाल said...

दर्द तेरे ज़ख्म का उभरे मेरे दिल में अगर
आंख में तेरी, मेरा आंसू भी आना चाहिये
वाह!!
साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये
बहुत खूब ...बस यही भाव हर हिन्दुस्तानी के दिल में रहे तो यह चमन सदा सदा महकता ही रहेगा .
बहुत बहुत शुभकामनाएँ!!

ज्योति सिंह said...

साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये
kitne umda khyal hai ,raushan rahe jahan aese hi ,gantantra divas ki badhai aapko .

सुनील गज्जाणी said...

नमस्कार !
दर्द तेरे ज़ख्म का उभरे मेरे दिल में अगर
आंख में तेरी, मेरा आंसू भी आना चाहिये
वाह!!
साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये
बहुत खूब .बस यही भाव हर हिन्दुस्तानी के दिल में रहे तो यह चमन सदा सदा महकता ही रहेगा .
बहुत बहुत शुभकामनाएँ!!

mahendra verma said...

साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें,
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये।

देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण एक श्रेष्ठ रचना।

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं।

दिगम्बर नासवा said...

साज़िशों से जो झुकाना चाहते हैं, अब उन्हें
और ऊंचा ये तिरंगा कर दिखाना चाहिये


झंडा ऊँचा रहे हमारा ...
शाहिद साहब .... बहुत लाजवाब ग़ज़ल है ... गणतंत्र दिवस पर इससे बेहतर और क्या हो सकता है ...
अगर सब मिल जाएँ तो ये तिरंगा आसमान को छू सकता है ...

Ravi Rajbhar said...

Der se aane ke liye mazrat chahunga,
gazal ke bhawo ne bhajuwo ko fadfada diya.
badhai swikare.

Mrs. Asha Joglekar said...

शाहिद साहब लफ्ज़ नही हैं तारीफ के लिये । दुआ करती हूँ कि यही जज्ब़ा हम सब के दिलों में हो खासकर नौ-जवानों में । सारे के सारे शेर हीरे हैं किसे उद्धरित करूं किसे न करूं ।

JALES MEERUT said...

फिर यहां टैगोर का गूंजे फिज़ां में राष्ट्रगान
फिर यहां इक़बाल का क़ौमी तराना चाहिये
देश को ऐसा समझने समझाने वाले कलमकारों फनकारों की जरुरत है |

Anil Avtaar said...

वाह.. वाह.. क्या खूब लिखी है आपने ! आपको सलाम, आपके हुनर को सलाम और सबसे बड़े आपके जज्बे को सलाम ! अपने जज्बे को बनाये रखिये ताकि हम जैसे नौजवानों को आपसे प्रेरणा मिल सके..