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Thursday, November 19, 2009

ईद मुबारक

साहेबान, ईद आ गयी है.

चांद नज़र आ चुका है

तैयारियां भी शुरू हो गयी हैं



आप सबको ईद की मुबारकबाद

लीजिये ईद पर एक ग़ज़ल हाज़िर है-

हर घर के आंगन में लेकर आती है खुशहाली ईद
महकाती
है दिल का हर गुल, हर पत्ता, हर डाली ईद


रस्म-तकल्लुफ बनकर रह गई अब तो यारो खाली ईद
याद
बहुत आती है मुझको अपने बचपन वाली ईद


चांद निराला होता है अपना ए यार निराली ईद
एक
नज़र बस राह में उनको देखा और मना ली ईद


खुशियां मिलकर साथ मनाने के त्यौहार बहाने हैं,

सबका
है पैगाम मुहब्बत, बैशाखी, दीवाली, ईद


रूठ गये जो हमसे ''शाहिद'' हमने उनकी यादों से
उम्मीदों
का दीप जलाया और खुशियों में ढाली ईद


शाहिद मिर्ज़ा 'शाहिद'

8 comments:

दिगम्बर नासवा said...

खुशियां मिलकर साथ मनाने के त्यौहार बहाने हैं,
सबका है पैगाम मुहब्बत, बैशाखी, दीवाली, ईद ..

BAHUT LAJAWAAB LIKHA HAI ... KAMAAL KA LIKHA HAI .... ED HAMARE DUBAI MEIN TO 27 KO MANAAI JAAYEGI ... PAR SABHI BANDHUON KO AAJ SE HI EK MUBAARAK ...

prerna said...

wah hamen toh bahut achchha laga yahan aakar.
badhai ho
hindi premi

jaan said...

याद बहुत आती है मुझको अपने बचपन वाली ईद
Assalamu Alaykum
Janab Shahid ji waqayii apne boho umdha likha hai ye jo line hai hamari aajkh ko nam kar gayii bilkul sach kaha apne abto bas rasmi Eid rehgayai hai khair ham Allah se duago hain ki aapka kalam chalta rahe....waise hamne jo khwahish zaher ki thi wo abhi tak adhuri hai

शबनम खान said...

रस्म-तकल्लुफ बनकर रह गई अब तो यारो खाली ईद
याद बहुत आती है मुझको अपने बचपन वाली ईद..
सच में बचपन की त्यौहारों वाली ख़ुशी न जाने कहा खो सी गई है।
खूबसूरत पेशकश....

इस्मत ज़ैदी said...

रूठ गये जो हमसे ''शाहिद'' हमने उनकी यादों से
उम्मीदों का दीप जलाया और खुशियों में ढाली ईद
ise kahte hain zindadili aur ashavadita ,duniya shayad isi ka naam hai ,is ashavadi sherke liye badhai

ज्योति सिंह said...

रूठ गये जो हमसे ''शाहिद'' हमने उनकी यादों से
उम्मीदों का दीप जलाया और खुशियों में ढाली ईद
waah kya kahne ,bahut khoobsurat khyaal hai .badhai aapko .

रानीविशाल said...

रस्म-तकल्लुफ बनकर रह गई अब तो यारो खाली ईद
याद बहुत आती है मुझको अपने बचपन वाली ईद
बचपन कितना अनमोल है यह तो बड़े होकर ही पता चला तब हर छोटी छोटी बात पर भी कितनी ख़ुशी मिला करती थी दिल को ...अब तो वो अनुभूति गुम ही हो गई है .
चांद निराला होता है अपना ए यार निराली ईद
एक नज़र बस राह में उनको देखा और मना ली ईद
वाह ! मुबारकबाद

हरकीरत ' हीर' said...

एक नज़र बस राह में उनको देखा और मना ली ईद

ओये होए .....!!
शहीद जी इस एक मिसरे ने तो लूट ही लिया ....!!