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Wednesday, November 17, 2010

बहारों पे बहार आई है


हज़रात
सबसे पहले हाजियों को मुबारकबाद...
और ये इल्तजा-

मुस्तुफ़ा की वो ज़मीं और वहां के मंज़र
ये सुना है, हैं वहां दोनों जहां के मंज़र
जब मैं झांकूं तो मुझे अक्स नज़र आ जाए
अपनी आंखों में बसा लाना वहां के मंज़र
और अब
आप सभी को ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद
(ईद की ग़ज़लें यहां भी हैं)

आखर कलश

एक नज़र बस राह में उनको देखा और मना ली ईद

ईद मना  

लीजिए हाज़िर है एक क़ता 

हर नज़ारे में है पैग़ामे-मुसर्रत शाहिद
अपने हिस्से की खुशी मैंने बहुत पाई हैं
मुस्कुरा्ते हुए सूरज ने बिखेरी किरनें
ईद का दिन है, बहारों पे बहार आई है
            शाहिद मिर्ज़ा शाहिद

43 comments:

वन्दना अवस्थी दुबे said...

जब मैं झांकूं तो मुझे अक्स नज़र आ जाए
अपनी आंखों में बसा लाना वहां के मंज़र
बहुत खूब शाहिद जी.
ईद मुबारक हो, आपको, सपरिवार.

निर्मला कपिला said...

शाहिद जी आपको ईद की बहारों के मुबारक मौके पर बहुत बहुत बधाई हार्दिक शुभकामनायें।

deepak saini said...

वाह वाह शाहिद साहब
बहुत खूब

इस्मत ज़ैदी said...

दोनों क़त’आत बहुत उम्दा हैं

मुस्कुरा्ते हुए सूरज ने बिखेरी किरनें
ईद का दिन है, बहारों पे बहार आई है

बहारों पर बहार का आना ,क्या बात है!
बहुत ख़ूब!

राणा प्रताप सिंह (Rana Pratap Singh) said...

बहुत खूब......... आपको भी ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद।

राणा प्रताप सिंह (Rana Pratap Singh) said...

बहुत खूब......... आपको भी ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद।

Unknown said...

eid mubarak...

सतीश सक्सेना said...

ईद के पाक मौके पर मैं आपको व आपके परिवार को हार्दिक शुभकामनायें देता हूँ !

राजेश उत्‍साही said...

ईद मुबारक और मुबारक देव उठनी ग्‍यारस।

rashmi ravija said...

मुस्कुरा्ते हुए सूरज ने बिखेरी किरनें
ईद का दिन है, बहारों पे बहार आई है

सच है...बहारों पे बहार आई है....ईद की बहुत बहुत मुबारकबाद

shikha varshney said...

बहुत खूब शाहिद जी ! आपको सपरिवार ईद बहुत बहुत मुबारक

Dr. Ashok palmist blog said...

जब मैँ झाँकू तो मुझे अक्स नजर आ जाये

अपनी आँखोँ मेँ बसा लाना वहाँ के मँजर

बहुत ही लाजबाव हैँ। आपको सपरिवार ईद की मुबारकवाद।

पढ़िये ब्लोग "Sansar" पर गजल :-
"जो भी पाया था कभी खुदा से मैँने"

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ....ईद मुबारक हो

नीरज गोस्वामी said...

मुस्कुरा्ते हुए सूरज ने बिखेरी किरनें
ईद का दिन है, बहारों पे बहार आई है

वाह वाह वाह बहारों पर बहारें ईद के मुक़द्दस दिन ही आ सकती हैं...वाह

नीरज

"अर्श" said...

आदाब मिर्ज़ा साब,
आज के इस मुक़द्दस मौके पर दोनों ही क़त'आत लाज़वाब..
जब मैं झांकूं तो मुझे अक्स नज़र आ जाए/ और बहारों पर बहारें ...
बधाई कुबूल फरमाएं

अर्श

अरुण चन्द्र रॉय said...

ईद मुबारक हो, आपको, सपरिवार.

Mrs. Asha Joglekar said...

ईद का दिन है बहारों पे बहार आई है । क्या खूब लिखा है । ईद मुबारक ।

सुलभ § Sulabh said...

मुबारकबाद!!

kumar zahid said...

मौक़ा ए वक्ते़अकीदत है कि इन्शाअल्लाह
इन बहारों में हमें याद वो करते होंगे।

मुबारक जनाब!

muflis said...

aap sb ki bahaaroN mei
aur bahaar aur bahaar aaye..
inhi duaaoN ke saath
aap sb ko Eid ki MUBARAKBAAD.

Vijay Pratap Singh Rajput said...

बहुत सुन्दर है
ईद मुबारक हो, आपको, सपरिवार.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

ईद-मुबारक!

रचना दीक्षित said...

बहुत नेक विचार. ईद की बहुत शुभकामनायें.

अनामिका की सदायें ...... said...

बहुत निर्मल भाव.ईद मुबारक.

रानीविशाल said...

वाह ! कितने सुन्दर भाव ....आपको सपरिवार ईद-उल-अज़हा की हार्दिक शुभकामनाएँ !!

nilesh mathur said...

आप को ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद!

Shah Nawaz said...

बेहतरीन!

आपको भी ईद बहुत-बहुत मुबारक हो!

DR. ANWER JAMAL said...

खुदा की है सारी ज़मीं सारे मंज़र
काश यहाँ भी हो वहाँ का मंज़र

DR. ANWER JAMAL said...

ईद मुबारक !
Nice post .
मालिक सबका शुभ करे ।
विशेष : तर्क वितर्क से मेरा मक़सद केवल संवाद है और संवाद का मक़सद सत्पथ की निशानदेही करना है ।
किसी के पास सत्य का कोई अन्य सूत्र है तो मैं प्रेमपूर्वक उसका स्वागत करता हूं , अपने कल्याण के लिए , सबके कल्याण के लिए ।
कल्याण सत्य में निहित है ।
ahsaskiparten.blogspot.com पर देखें

दिगम्बर नासवा said...

मुस्कुरा्ते हुए सूरज ने बिखेरी किरनें
ईद का दिन है, बहारों पे बहार आई है ...

बहारें मुस्कुरा रही हैं .... ईद के इस मुक़द्दस मौके पर सभी को बहुत बहुत मुबारकबाद ....

हरकीरत ' हीर' said...

एक नज़र बस राह में उनको देखा और मना ली ईद

ओये होए .....!!
शहीद जी इस एक मिसरे ने तो लूट ही लिया ....!!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

ईद-उल-अज़हा की मुबारकबाद !

सुमन'मीत' said...

बहुत सुन्दर......गहरी अभिव्यक्ति..........

अमिताभ श्रीवास्तव said...

जनाब मिर्ज़ा साहब,

अव्वल, आपको ईद उल अज़हा की मुबारकबाद। देर से ही सही मगर दिल से..। जो इल्तज़ा फरमाई है आपने..याद दिलाती है मुझे जब मेरे खास दोस्त हज़ पर जा रहे थे और मैं उन्हें मुम्बई में मिला था, तब उनसे गुजारिश की थी कि वे वहां के एक एक वाक्ये सुनाये..तस्वीरे पेश करे जो उनकी आंखे देखे..। जब लौटे तो करीब तीन घंटों तक धाराप्रवाह सुनता रहा उनके मुंह से अल्लाह की जमीं के अद्भुत किस्से..दृष्य..और मानों ऐसा मस्त हुआ कि मैं भी कर गया हज़..। मुझे भी लगा मैं वहां हूं और अल्लाह मेरे सर पर हाथ रखे है..। बहरहाल..इल्तज़ा की चार लाइने आपकी जरूर हैं मगर उस वक़्त मेरी हालत इन चार लाइनों से परे नहीं थी।
कता..और मुबारकबाद का यह तरीका..लाज़वाब है।

Kunwar Kusumesh said...

मुस्कुरा्ते हुए सूरज ने बिखेरी किरनें
ईद का दिन है, बहारों पे बहार आई है

वाह वाह ,बहुत सुन्दर कहा आपने

' मिसिर' said...

बहुत खूब ,बधाई ! ईद मुबारक !

Manav Mehta said...

आज पहली बार आपके ब्लॉग पर आया हूँ बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति ........

देवेन्द्र पाण्डेय said...

वाह!

शारदा अरोरा said...

देर में आईं हूँ , ईद मुबारक हो ।

mridula pradhan said...

wah.

शरद कोकास said...

कभी ऐसा मौका आये ज़िन्दगी मे कि ईद आपके साथ मनाये.... आमीन ।

Manav Mehta said...

बेहद भावपूर्ण अभिव्यक्ति.........

http://saaransh-ek-ant.blogspot.com

अर्चना तिवारी said...

bahut khoob...blog par aane ka shukriya..